Tuesday, September 16, 2008

इंसानियत

आदमी सोचता कुछ हैं ओउर हो जाता कुछ हैं। हेर कदम एक ज़ंग हैं। इस ज़ंग मैं जो जीता तो भी हारकर, ओउर जो हरा वोह भी हारकर। जीत किसीकी नही होती हैं। येही कुदरत का खेल हैं। जब कोई संत कहते हैं के जा बेटे उस परमेश्वर के चरण में, तो वोह जाता नही हैं, क्यों? क्यों की उसे विश्वास नही होता। और जब जाता हैं तो बहुत देर हो चुकी होती हैं। तब उसे इस बात का भी एहसास नही रहता की अब देर हो चुकी हैं। यहाँ सब कुछ अपने हिसाब से नही चलता हैं। यहाँ पैर उस परमेश्वर का नियम हैं जिसने यह सुंदर शरुष्टी का निर्माण किया । जो उस पैर निरंतर श्रद्धा रखते हैं, वोह कभी निराश नही होते, जियो और जीने दो येही संदेश भगवन महावीर ने दिया। लेकिन आज के दौर मैं हम जिए और तुम्हे मारे येही सब जगह दिखाई पढता हैं। किसी के भी नाम पैर किसी के भी साथ उलझ पढ़ना, येही फितरत हैं इंसान की।

अगर अभी भी मन शान्ति चाहते हो तो यह तत्त्व को अपनाओ, भला किसीका नही कार सके तो कोई गम न कर। लेकिन किसी का बुरा मत कर। इतना भी कर लिया तो शायद इस जिंदगी की ज़ंग तुम जीत जओंगे।
बापू यानि महात्मा गाँधी सारे उमर येही कहते रहे झूट मत बोल लेकिन किसीने सुना नही। येही सच्चाई हजारों संतों ने भी कही, भगवन महावीर यानि जिन धरम का तत्त्व येही हैं। इसे जानो तो पो.

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